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स्वामी विवेकानन्द को आज कौन नहीं जानता? उनका विराट बहुमुखी व्यक्तित्व एक तराशे हुए हीरे के समान है जिसे जिस दिशा से भी देखा जाय सुन्दर और प्रकाश पुंज प्रतीत होता है। लेकिन आखिर स्वामी विवेकानन्द थे कौन? वे मानव थे या देवता? और यदि वे मानव थे, तो हम सामान्य मानवों से किन बातों में महान थे? विद्वान् लेखक ने इन्हीं कुछ प्रश्नों पर अपने विचार हमारे समक्ष रखने का प्रयत्न किया है। वह नहीं चाहता कि पाठक उसके विचारों को बिना सोचे स्वीकार करें। स्वामी विवेकानन्द के 150 वें जन्मवर्ष में हम सभी स्वतन्त्र रूप से स्वामीजी को जानने का प्रयत्न करें, यही लेखक का उद्देश्य है।