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१८९३ में अमेरिका के शिकागो नगर में जो विश्वधर्म महासभा हुई थी उसकी शताब्दी सारे भारत में और अन्यत्र भी अत्यन्त उत्साह के साथ मनायी जा रही है। इसी उपलक्ष्य में यह महत्त्वपूर्ण प्रकाशन पाठकों को प्रस्तुत करने में हमें प्रसन्नता हो रही है। स्वामी विवेकानन्दजी के जीवन में इस विश्व धर्म महासभा का अति विशिष्ट स्थान है। इसी के माध्यम से विश्व को स्वामीजी का परिचय मिला। सुख्यात अमेरिकन विदुषी मेरी लुई बर्क (भगिनी गार्गी) द्वारा लिखित ‘Swami Vivekananda in the West’’ नामक छः खण्डात्मक बृहत् ग्रन्थ के प्रथम खण्ड के ‘The Parliament of Religions’ नामक अध्याय का यह अनुवाद है। इसमें इस ऐतिहासिक विश्वधर्म महासभा की पृष्ठभूमि, उसका आयोजन एवं गतिविधियाँ इन सब का स्वामीजी के सन्दर्भ में बड़ा ही रोचक एवं उद्बोधक वर्णन आता है। स्वामीजी ने इस महासभा में कैसी अहम् भूमिका निभायी तथा इसके द्वारा अपने गुरुदेव का सर्वधर्म-समन्वय का सन्देश और अपनी मातृभूमि का गौरव संसार के सम्मुख उज्ज्वलता से अंकित किया यह हम इस लघुग्रन्थ के अध्ययन से समझ सकते हैं।